कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: विकास और सुशासन के दावों के बीच कोरबा जिले के पाली विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है। पाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत ईरफ के हर्राडीह गांव में सड़क और पुल के अभाव के कारण ग्रामीणों को एक महिला के शव को बांस की डांडी पर रखकर करीब दो किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार हर्राडीह निवासी मोतीलाल भुनुवार की पत्नी का कुछ दिन पहले निधन हो गया। अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव से बाहर ले जाना था, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण कोई वाहन नहीं पहुंच सका। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी से डांडी तैयार की और महिला के शव को कंधों पर उठाकर लगभग दो किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचे। वहां से आगे अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई।
घटना के दौरान मौजूद किसी ग्रामीण ने पूरी अंतिम यात्रा का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में दर्जनों ग्रामीण बांस की डांडी पर शव को कंधों पर लेकर चलते दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे महिलाएं और अन्य ग्रामीण भी अंतिम यात्रा में शामिल हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर बहस तेज हो गई है।
नाला बना सबसे बड़ी बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि गांव और मुख्य सड़क के बीच एक नाला पड़ता है, जिस पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका। बरसात के दिनों में नाला उफान पर होने से गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। सड़क और पुल नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी आवागमन कठिन रहता है, जबकि बारिश में हालात और गंभीर हो जाते हैं।
मरीजों को भी खाट पर ले जाना पड़ता है
ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। किसी के बीमार होने पर मरीजों को खाट या चारपाई के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। गांव तक एम्बुलेंस और 108 संजीवनी सेवा नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होती है। बरसात के मौसम में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
वर्षों से सड़क और पुल की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वन विभाग से गांव तक सड़क और नाले पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वन क्षेत्र की जमीन होने का हवाला देकर हर बार उनकी मांग टाल दी जाती है, जबकि गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वीडियो के बाद उठे सवाल
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग सरकार और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि आज भी ग्रामीणों को अंतिम यात्रा के लिए शव को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
