जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पुटपुरा के सपूत डॉ. विवेक राठौर ने संस्कृत विषय में पीएचडी (विद्या-वारिधि) पूरी कर न केवल अपने परिवार और गाँव, बल्कि पूरे देश में राठौर समाज का नाम रोशन किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे राठौर समाज से संस्कृत में पीएचडी करने वाले पहले व्यक्ति हैं।
यह उपलब्धि वर्षों की कठिन साधना, अनुशासन और अडिग संकल्प का परिणाम है। सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद डॉ. राठौर ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति और संस्कृत साहित्य की समृद्ध विरासत को आधुनिक अकादमिक मंच पर प्रस्तुत किया है। उनका शोध कार्य न केवल शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत भाषा और शास्त्रीय परंपरा से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
ग्राम पुटपुरा सहित पूरे क्षेत्र में इस उपलब्धि पर हर्ष और उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. विवेक राठौर की सफलता ने ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश दिया कि गाँव से निकलकर भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।
डॉ. राठौर के परिवार और मार्गदर्शकों ने इस उपलब्धि में योगदान दिया। उनके मार्गदर्शक थे: विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, विषय विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र शर्मा, तथा अन्य मार्गदर्शक डॉ. विवेक बाजपेई, डॉ. संजीव पाठक, डॉ. जांगड़े सर, डॉ. भास्कर सर और डॉ. पाण्डेय मैडम। ग्राम पुटपुरा और समाज की ओर से डॉ. विवेक राठौर को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। उनके उज्ज्वल ज्ञान और सेवा पथ से देश और समाज हमेशा गौरवान्वित होगा।
