बिहार चुनाव से पहले राज्य में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण करवाया जा रहा है। कई विपक्षी दलों ने वोटर लिस्ट रिवीजन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब सुप्रीम कोर्ट बिहार विस चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा। कुल नौ राजनीतिक दलों ने बिहार में मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के फैसले को चुनौती दी है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट में दो और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर की है। पीठ अन्य लंबित याचिकाओं के साथ इस पर गुरुवार को सुनवाई के लिए सहमत हुई। अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि अरशद अजमल और रूपेश कुमार ने राज्य में एसआईआर कराने के निर्वाचन आयोग के 24 जून के फैसले को चुनौती दी है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर बिहार में उत्साह: आयोग
इधर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि बिहार के मतदाताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए शुद्ध मतदाता सूची जरूरी है। दिल्ली में बीएलओ से आयोग ने कहा कि मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी के परिणामस्वरूप बिहार में चल रहे एसआईआर के तहत बुधवार तक 57 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्म सफलतापूर्वक एकत्र किए जा सके हैं।
बताया कि इस प्रक्रिया के 16 दिन अभी शेष हैं। आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ था, है और हमेशा रहेगा। कुमार की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विभिन्न विपक्षी दलों ने बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर की मंशा पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आयोग लगातार कहता रहा है कि 22 साल बाद हो रहे इस पुनरीक्षण से मतदाता सूची से अपात्र लोगों और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाया जाएगा और कानून के अनुसार, मतदान के पात्र लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।