भारत में 1 मार्च से SIM Binding नियम लागू होने जा रहा है, जिसका सीधा असर WhatsApp, Telegram, Snapchat और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स के करोड़ों यूजर्स पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस फैसले में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
1 मार्च से अनिवार्य होगा नियम
दूरसंचार विभाग Department of Telecommunications (DoT) ने नवंबर के अंत में इन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी किया था कि उनकी सेवाएं केवल उसी स्थिति में सक्रिय रहेंगी जब फोन में वही असली और एक्टिव SIM कार्ड मौजूद होगा, जिससे अकाउंट बनाया गया है। कंपनियों को नियम लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था, जिसकी अवधि अब पूरी हो रही है। निर्धारित समयसीमा के अनुसार यह नियम 1 मार्च से प्रभावी हो जाएगा।
क्या है SIM Binding?
SIM Binding का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप उसी मोबाइल SIM से लिंक रहेगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। यदि SIM निकाल दी जाती है, दूसरी SIM डाली जाती है, SIM बंद हो जाती है, नंबर पोर्ट हो जाता है। तो संबंधित ऐप अपने-आप लॉग-आउट हो जाएगा और सेशन समाप्त हो जाएगा। सरल शब्दों में ऐप की पहचान सीधे SIM से जुड़ जाएगी।
Web और Companion डिवाइस पर क्या असर?
नए नियमों के तहत वेब सेशन 6 घंटे से ज्यादा सक्रिय नहीं रह सकेंगे। WhatsApp Web और Telegram Web जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऑटो-लॉगआउट होगा। ऐप्स को लगातार यह सत्यापित करना होगा कि रजिस्टर्ड SIM फोन में लगी और सक्रिय है। हालांकि, 6 घंटे वाला नियम मुख्य रूप से वर्चुअल या वेब कनेक्शन पर लागू होगा, मोबाइल ऐप पर नहीं।
सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?
सरकार का कहना है कि टेलीकॉम आधारित ऑनलाइन फ्रॉड, खासकर SIM-Swap फ्रॉड, “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर स्कैम, तेजी से बढ़े हैं।
अब तक बड़ी खामी यह थी कि SIM हटाने के बाद भी मैसेजिंग ऐप का सेशन चालू रहता था, जिसका फायदा ठग उठाते थे। SIM Binding के जरिए इस कमजोर कड़ी को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार का दावा है कि इससे मोबाइल नंबर की ट्रेसिंग मजबूत होगी, फर्जी पहचान से फ्रॉड कम होगा, जवाबदेही तय करना आसान होगा।
यूजर्स को क्या करना होगा?
उसी नंबर की SIM एक्टिव रखें जिससे अकाउंट बना है
SIM बदलने पर दोबारा वेरिफिकेशन के लिए तैयार रहें
वेब वर्जन का उपयोग करते समय बार-बार लॉगिन करना पड़ सकता है
SIM Binding नियम डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब देखना होगा कि 1 मार्च के बाद इसका जमीनी असर कितना व्यापक होता है।