बारिश के बीच उजड़े 20 आदिवासी परिवारों के घर, बिना नोटिस मकान ध्वस्त करने का आरोप, ग्रामीणों ने FIR और मुआवजे की मांग की

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा के खलारीपारा में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 13 जून को वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर खसरा नंबर 597 स्थित भूमि पर बने लगभग 20 आदिवासी परिवारों के मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। प्रभावित परिवारों का दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस या पूर्व सूचना नहीं दी गई।

ग्रामीणों के अनुसार मकान तोड़े जाने के दौरान महिलाओं ने विरोध जताया तो उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और हाथापाई की गई। आरोप है कि पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने महिलाओं को जबरन घरों से बाहर निकाला।

घटना में 65 वर्षीय तीज कुंवर के हाथ में गंभीर चोट आई, जबकि 60 वर्षीय राम कुंवर के सिर पर चोट लगने की बात सामने आई है। वहीं ललिता बाई ने आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मियों ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें जबरन घर से बाहर खींचा।

घरेलू सामान और राशन भी हुआ नष्ट

ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई में कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई समेत करीब 20 परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। मकानों के मलबे में घरेलू सामान, राशन, कपड़े और बर्तन दबकर नष्ट हो गए। प्रभावित परिवारों ने प्रति परिवार 10 से 15 हजार रुपये तक के नुकसान का दावा किया है।

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि वे गोंड जनजाति से संबंधित हैं और पिछले लगभग 25 वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई के दौरान जब उन्होंने अधिकारियों से बारिश के मौसम में रहने की वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में सवाल किया तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

बारिश के बीच मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था किए की गई यह कार्रवाई मानवीय संवेदनाओं, कानूनी प्रक्रियाओं और उनके अधिकारों के विपरीत है।

पाली थाने में शिकायत, कार्रवाई की मांग

घटना के बाद सोमवार को प्रभावित ग्रामीणों ने पाली थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं में तीज कुंवर, राम कुंवर, ललिता बाई, कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई, कुलदीप सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।

ग्रामीणों ने कथित मारपीट और दुर्व्यवहार में शामिल वन विभाग एवं पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, दोषियों पर कार्रवाई करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास, राहत सामग्री और उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।

आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाएंगे। उनका कहना है कि न्याय नहीं मिलने की स्थिति में क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

फिलहाल मामले में वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि प्राप्त शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन और वन विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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