कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: SECL के कुसमुंडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीण हाथों में तख्तियां लिये बुधवार को कटघोरा एसडीएम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। 16 से अधिक गांवों के ग्रामीण रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और राजस्व संबंधी लंबित मामलों को लेकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास भी किया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दीपका, दर्री और कटघोरा तहसील सहित जिला पुनर्वास शाखा में काम कराने के लिए रिश्वत मांगी जाती है, नहीं देने पर फाइलों को लंबित रखा जाता है। उनका कहना है कि रोजगार, वंश वृक्ष, फौती, ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार और राजस्व त्रुटि सुधार जैसे मामलों में महीनों से कार्रवाई नहीं हो रही है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि एसईसीएल द्वारा जटराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, आमगांव, खैरभावना, गेवरा, जरहाजेल, बरपाली, दुरपा, भैसमाखार, मनगांव, बरमपुर, दुल्लापुर और बरकुटा सहित कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है, लेकिन विस्थापित परिवारों की समस्याएं अब तक हल नहीं हुई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि भूमिहीन परिवारों को बसाहट का अधिकार नहीं दिया जा रहा, जबकि कई लोग वर्षों से सरकारी और निजी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कई परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी प्रभावित हो रहा है।
खोडरी, रिसदी और पड़निया में लगाए गए राजस्व शिविरों को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शिविरों में केवल आवेदन लिए गए और आगे की प्रक्रिया के लिए लोगों को तहसील दीपका भेज दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों ने एसईसीएल के ड्रोन सर्वे पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना सहमति संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है और इससे मुआवजा राशि कम तय की जा सकती है।
जटराज गांव के ग्रामीणों ने 2010 के भूमि अधिग्रहण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ लोगों को ‘मसाहती’ मान्यता दी गई, जबकि अन्य प्रभावित परिवारों को इससे बाहर रखा गया है।
भू-विस्थापितों का कटघोरा SDM कार्यालय में उग्र प्रदर्शन, लंबित मांगों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर फूटा गुस्सा
