बाल विवाह रोकने के लिए कोरबा में 100 दिवसीय अभियान, लोगों को बताए बाल विवाह के दुष्परिणाम

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  कोरबा जिले में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान चलाया गया। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर यह अभियान गांवों और कस्बों में केंद्रित रहा। अभियान की शुरुआत कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना महंत ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर की थी।

गांव-गांव पहुंचा मुक्ति रथ

यह ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ जिलेभर के दूरस्थ गांवों और पंचायतों तक पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अभियान से जोड़ा गया। रथ के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

तीन चरणों में चला अभियान

यह अभियान तीन चरणों में संचालित किया गया। पहला चरण: स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ा गया। दूसरा चरण: धर्मगुरुओं से अपील की गई कि विवाह कराने से पहले दूल्हा-दुल्हन की उम्र की जांच करें और बाल विवाह से इनकार करें। तीसरा चरण: कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल मालिकों, बैंड और घोड़ी वालों से भी बाल विवाह में अपनी सेवाएं न देने का आग्रह किया गया।

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की घोषणा की थी। इस अभियान के तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने देश के 439 जिलों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकालकर लोगों को जागरूक किया।

अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि बाल विवाह कोई सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। यह बच्चियों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और उन्हें कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।

इस अभियान का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाकर बाल विवाह को जड़ से समाप्त करना है।

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