दिवाली पर कब करें मां लक्ष्मी की पूजा? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी नियम, यहां जानें बस एक क्लिक में….

By Atul Yadav - Editor
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दिवाली 2025:  इस साल दिवाली का पावन पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को मनाई जाने वाली दिवाली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और मां काली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन धन-धान्य, समृद्धि और सुख-शांति के लिए दीप जलाकर देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है।

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2025 (Diwali Laxmi Puja Muhurat)

इस वर्ष दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को निम्नलिखित रहेगा:

प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 07:08 बजे से रात 08:18 बजे तक

वृषभ काल: शाम 07:08 बजे से रात 09:03 बजे तक

निशिता काल (गुप्त पूजन / तांत्रिक पूजा हेतु): रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक

शुभ चौघड़िया मुहूर्त (Choghadiya for Diwali 2025)

काल मुहूर्त समय प्रकार

अपराह्न 03:44 PM – 05:46 PM चर, लाभ, अमृत
सायाह्न 05:46 PM – 07:21 PM चर
रात्रि 10:31 PM – 12:06 AM (21 Oct) लाभ
उषा काल 01:41 AM – 06:26 AM (21 Oct) शुभ, अमृत, चर


दिवाली पूजा विधि (Lakshmi Puja Vidhi)

  1. घर की सफाई और शुद्धिकरण:
    दिवाली से पहले पूरे घर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  2. रंगोली और दीप सजावट:
    मुख्य द्वार और पूजास्थल के पास रंगोली बनाएं और दीप जलाएं।
  3. पूजा की तैयारी:

पूजा स्थल पर चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाएं।

उस पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, राम दरबार और कुबेर की प्रतिमा स्थापित करें।

लक्ष्मी जी को श्री गणेश के दाहिने रखें।

  1. पूजन सामग्री में शामिल करें:

कलश, दीपक (घी और तेल के), पुष्प, मिठाई, फल

पान, सुपारी, लौंग, इलायची, कमलगट्टा

हल्दी, चावल, रोली, मौली, जल

  1. पूजन क्रम:

मूर्तियों पर तिलक लगाएं

घी का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें

विधिपूर्वक लक्ष्मी जी का पूजन करें, मंत्रोच्चार करें

अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें

  1. दीप जलाने की परंपरा:
    घर के कोनों, दरवाज़ों और खिड़कियों पर दीप जलाएं।
    दो मुख्य दीपक — एक घी का और एक सरसों के तेल का बड़ा दीपक — मंदिर में रखें, जो पूरी रात जलते रहें।

दीवाली पूजा नियम (Diwali Puja Niyam)

– दीवाली पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण न करें।
– किसी से वाद-विवाद न करें।
– किसी के बारे में गलत न सोचें।
– घर और मंदिर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
– पूजा में टूटे हुए बर्तन प्रयोग न करें।
– मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की खंडित मूर्ति की पूजा न करें।

मां लक्ष्मी के मंत्र
1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

3. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

दिवाली पर कितने दीपक जलाएं?

2 बड़े दीपक (घी और तेल के) मंदिर में रखें, जो अखंड जलते रहें।

न्यूनतम 13 या 26 छोटे दीपक अवश्य जलाएं।


दिवाली की मान्यता और महत्व

दिवाली पर यह मान्यता है कि महालक्ष्मी धरती पर आती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित घरों में वास करती हैं। अतः स्वच्छता और दीपों की सजावट इस दिन विशेष महत्व रखती है। यह दिन धन, समृद्धि, शुभता और शुभ शुरुआतों का प्रतीक होता है।

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