मनखे-मनखे एक समान’: गुरु घासीदास जयंती पर उमड़ा आस्था और सामाजिक समरसता का सैलाब

Anil Jatwar
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गेवरा/दीपका/सीजी एनएन 24 न्यूज: बाबा गुरु घासीदास जयंती का पर्व एक ऐसा अवसर होता है जब गाँव गाँव और कस्बे कस्बे में छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज ही नहीं अपितु बहुतेरे संगठन और जातीय समाज एक साथ आते हैं और मनखे  मनखे एक समान का भाव जगाते हैं। ‘सत्य ही मानव का आभूषण है’ के पावन संदेश के साथ सोमवार को दीपका शहर पूरी तरह सतनाम मय हो गया। अखिल भारतीय सतनामी समाज दीपका समिति द्वारा आयोजित बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती (गुरु पर्व) के अवसर पर 22 दिसंबर को एक ऐतिहासिक शोभायात्रा और सतनाम भवन में जयंती का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

गुरु घासीदास जयंती के शुभ अवसर पर पूरे गेवरा-दीपका में ‘जय सतनाम’ के नारों, बाइक रैलियों और भव्य शोभायात्राओं का आयोजन किया गया, जिनमें ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश दिया गया और पंथी नृत्य के ज़रिए सामाजिक समरसता व भाईचारे का संदेश फैलाया गया, जिससे पूरे दीपका नगर में उत्साह और एकता का माहौल रहा, 

शोभायात्रा में दिखा शक्ति और संस्कृति का संगम: दिपका में जैतखंभ से रैली निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में लोग, ध्वज और झांकियां शामिल थीं, जो “जय सतनाम” के नारों से गूंज उठीं।
• पंथी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम: युवाओं और महिलाओं ने पंथी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं और अखाड़ा प्रदर्शन भी किया, जिससे रैली और भी भव्य हो गई।
• सामाजिक संदेश: रैलियों का उद्देश्य गुरु घासीदास के ‘मनखे-मनखे एक समान’, सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था।

शोभायात्रा के दौरान सतनामी समाज
रात्रि जयंती आयोजन
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