कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: कोरबा जिले की ग्राम पंचायत सेमीपाली में पंचायत सचिव कविता साहू के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपते हुए सचिव को तत्काल हटाने और उनके पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव कविता साहू पिछले 12 वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं और इसी का लाभ उठाकर मनमानी कार्यशैली अपनाई जा रही है। शिकायत में कहा गया है कि शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी जानबूझकर ग्रामीणों से छिपाई जाती है और विकास कार्यों के नाम पर राशि की निकासी कर ली जाती है, जबकि धरातल पर काम अधूरा या नाममात्र का होता है।

निर्माण कार्यों में भारी गड़बड़ी का आरोप
शिकायत के अनुसार, विगत वर्ष श्मशान घाट निर्माण और वर्तमान वर्ष सीसी रोड निर्माण के लिए पंचायत खाते से राशि आहरित की गई, लेकिन मौके पर अपेक्षित निर्माण कार्य नहीं हुआ। वहीं तालाब गहरीकरण कार्य में नाले से मिट्टी निकालकर काम कराया गया, जिसका भुगतान मजदूरों को आज तक नहीं मिला। आरोप है कि मजदूरी की पूरी राशि निकाल ली गई और फर्जी नामों से भुगतान दर्शाया गया।
जल जीवन मिशन में भी अनियमितता
ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन के तहत भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, योजना में कुल 11 बोर स्वीकृत थे, लेकिन गांव में केवल 7 बोर ही लगाए गए हैं। शेष बोरों को लेकर सरपंच और सचिव द्वारा दबाव बनाकर कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है।
रिश्वत, धमकी और जानकारी छिपाने के आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत से संबंधित किसी भी जानकारी या योजना का लाभ लेने के लिए रिश्वत की मांग की जाती है। विरोध करने पर झूठे मामलों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी दी जाती है। सचिव द्वारा पंचायत मुख्यालय में भी अनियमित रूप से उपस्थित रहने और आय-व्यय का ब्यौरा न देने का आरोप लगाया गया है।
पूर्व शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इससे पहले श्रीमती केवरा बाई सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने पर सचिव को तत्काल पद से हटाया जाए और पंचायत में हुए कथित वित्तीय घोटालों की जिम्मेदारी तय की जाए।
