कोरबा में 12 घंटे जाम पर बवाल! NHAI अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट पहुंची पुलिस; एजेंसी पर 10 लाख का जुर्माना

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  नेशनल हाईवे-130 पर ट्रेलर हादसे के बाद 12 घंटे तक यातायात बाधित रहने का मामला अब पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच टकराव की वजह बन गया है। राहत कार्य में देरी और जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही के आरोपों को लेकर पुलिस ने NHAI अधिकारियों के खिलाफ कटघोरा न्यायालय में परिवाद दायर किया है। दूसरी ओर, NHAI की जांच में भी खामियां सामने आई हैं, जिसके बाद संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

हादसे के बाद घंटों थमे रहे वाहनों के पहिए

घटना 12 अक्टूबर की सुबह करीब 2 बजे बांगो-मोरगा थाना क्षेत्र के मदनपुर घाट स्थित तारा घाटी के पास हुई। यहां नेशनल हाईवे-130 पर एक ट्रेलर (CG10 BS 5980) खराब होने के कारण सड़क पर खड़ा था। इसी दौरान कटघोरा की ओर आ रहे दूसरे ट्रेलर (CG10 BS 9436) ने पीछे से उसे टक्कर मार दी।

टक्कर के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। देखते ही देखते जाम ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी। बसों में सफर कर रहे यात्री, एंबुलेंस से ले जाए जा रहे मरीज और ट्रेन व हवाई यात्रा के लिए निकले लोग घंटों तक रास्ते में फंसे रहे। महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

फोन बंद मिलने से बढ़ी पुलिस की परेशानी

कटघोरा एसडीओपी विजय सिंह ठाकुर के मुताबिक, हादसे के बाद सड़क पर करीब 12 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके मोबाइल फोन बंद मिले। इससे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने और यातायात बहाल करने के प्रयासों में दिक्कत आई।

पुलिस का आरोप है कि संबंधित NHAI अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और राहत कार्य में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 222A के तहत कटघोरा न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी राहत कार्य में सहयोग नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

NHAI की जांच में भी मिलीं कई खामियां

मामले में NHAI ने भी अपने स्तर पर जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि चोटिया टोल प्लाजा के पास हुए हादसे के समय संबंधित एजेंसी मेसर्स रविन्द्र सिंह का परियोजना प्रबंधक मौके पर मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, क्रेन ऑपरेटर की अनुपलब्धता और रिकवरी उपकरणों में पर्याप्त ईंधन नहीं होने की बात भी सामने आई।

जांच में यह भी पाया गया कि 1033 हेल्पलाइन पर बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद समय पर सहायता नहीं पहुंची। NHAI ने इन कमियों को हाईवे पेट्रोलिंग और दुर्घटना प्रबंधन के निर्धारित मानकों का उल्लंघन माना।

एजेंसी पर 10 लाख रुपए की पेनल्टी

राहत एवं रिकवरी व्यवस्था में सामने आई खामियों के बाद NHAI ने संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई के साथ ही मामला दो स्तरों पर आगे बढ़ गया है। एक तरफ पुलिस ने अधिकारियों की कथित लापरवाही को लेकर न्यायालय का रुख किया है, वहीं दूसरी तरफ NHAI ने अपनी एजेंसी को आर्थिक दंड दिया है।

इस घटना ने हाईवे पर दुर्घटना के बाद त्वरित राहत, क्रेन की उपलब्धता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि न्यायालय में दायर परिवाद पर आगे क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं के दौरान राहत व्यवस्था कितनी प्रभावी बनाई जाती है।

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