शराब के खिलाफ कोलगा की महिलाओं ने खोला मोर्चा: लाठी लेकर निकलीं गलियों में; कहा- अब न शराब बनेगी, न बिकेगी…. पकड़े गए तो सीधे होंगे पुलिस के हवाले 

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  गांव में बढ़ती अवैध शराब की बिक्री और उससे बिगड़ते सामाजिक माहौल के खिलाफ अब ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। कोरबा जिले के कोलगा गांव में ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर पूर्ण शराबबंदी लागू करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए लाठी लेकर गांव की गलियों में रैली निकाली और शराब के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मामला करतला थाना क्षेत्र का है। शुक्रवार को आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि गांव में न तो कोई शराब बनाएगा, न बेचेगा और न ही इसका सेवन करेगा। निर्णय के बाद महिलाओं ने उन घरों का रुख किया, जहां कथित तौर पर अवैध शराब बनाने और बेचने का काम किया जाता है। उन्होंने संबंधित लोगों को समझाइश देते हुए इस गतिविधि को तत्काल बंद करने की चेतावनी दी।

शराब बेचने वालों को पुलिस के हवाले करने का फैसला

बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि गांव में शराब बनाते या बेचते पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पुलिस के हवाले किया जाएगा। महिलाओं ने भी दो टूक कहा कि गांव में दोबारा महुआ शराब की बिक्री शुरू हुई तो महिला समिति इसका विरोध करेगी।

घरेलू विवाद और मारपीट से परेशान हैं ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब की वजह से गांव का सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि शराब की लत केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि महिलाएं और स्कूली बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। नशे के कारण घरों में विवाद, घरेलू कलह और मारपीट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इसी समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शराबबंदी का फैसला लिया।

सरपंच की मौजूदगी में हुआ निर्णय, पुलिस ने की सराहना 

गांव में यह अहम निर्णय सरपंच संतराम राठिया की मौजूदगी में लिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर करतला थाना प्रभारी भी गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। ग्रामीण यदि शराब बनाने या बेचने की गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देंगे तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी कई बार आबकारी विभाग और पुलिस से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में शराब की बिक्री बंद नहीं हुई। ऐसे में अब उन्होंने खुद एकजुट होकर गांव को नशामुक्त बनाने की जिम्मेदारी उठाई है।

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