कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: कोरबा में पैरोल पर रिहा होने के बाद छह वर्षों से फरार चल रहे हत्या के एक सजायाफ्ता कैदी की गिरफ्तारी ने औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा और कर्मचारियों के सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार किया है, जबकि उसका दूसरा साथी अब भी फरार है।
पुलिस के मुताबिक मामला बालको थाना क्षेत्र के परसाभाठा का है। वर्ष 2007 में दरोगा कुर्मे की हत्या के मामले में उनके बेटों देवानंद कुर्मे और सूरज कुर्मे को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास के साथ 12-12 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया।
साल 2020 में 7 अप्रैल को दोनों आरोपियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। उन्हें 1 मई तक वापस जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन दोनों तय समय पर नहीं लौटे और फरार हो गए। एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर फरार कैदियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना पर पुलिस ने देवानंद कुर्मे को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पैरोल पर बाहर आने के बाद वह पहले अपने गांव गया और बाद में कोरबा लौटकर एक बड़े औद्योगिक संयंत्र के भीतर संचालित ठेका कंपनी में काम करने लगा। उसने नौकरी के लिए आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे और लंबे समय तक वहीं कार्यरत रहा।
चरित्र सत्यापन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सजायाफ्ता और फरार कैदी का वर्षों तक संवेदनशील औद्योगिक परिसर में काम करना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी की ओर इशारा करता है। अब यह जांच का विषय है कि नियुक्ति के दौरान उसका आपराधिक रिकॉर्ड क्यों और कैसे सामने नहीं आया।
पुलिस ने बताया कि मामले के दूसरे फरार दोषी सूरज कुर्मे की तलाश अभी भी जारी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
