कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: जिले के करतला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मरीज चंद्र प्रकाश ओझा ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि बुखार की जांच के लिए अस्पताल में केवल एक डिजिटल थर्मामीटर उपलब्ध था, जिसकी बैटरी भी डाउन थी। इसके बावजूद उनका तापमान जांचे बिना ही इलाज शुरू करने की तैयारी की जा रही थी।

कृष्णा नगर निवासी चंद्र प्रकाश ओझा और उनके परिजनों के अनुसार वे बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए करतला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। उस समय अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी से संबंधित डेमो कार्यक्रम चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उन्हें करीब 10 मिनट इंतजार करने के लिए कहा, लेकिन डॉक्टर के आने में लगभग आधा घंटा लग गया।
परिजनों का कहना है कि जब डॉक्टर मरीज को देखने पहुंचे तो उन्होंने तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का उपयोग नहीं किया। आरोप है कि डॉक्टर ने केवल हाथ लगाकर मरीज की स्थिति का आकलन किया और इसके बाद इंजेक्शन लगाने तथा सलाइन (बोतल) चढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान चंद्र प्रकाश ओझा और उनके परिजनों ने आपत्ति जताई और तापमान की सही जांच किए बिना उपचार शुरू करने पर सवाल उठाए।
चंद्र प्रकाश ओझा का कहना है कि उन्होंने विरोध इसलिए किया ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ ऐसी स्थिति न बने। मामले को लेकर उन्होंने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसे उन्होंने सार्वजनिक किया है। वीडियो में अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उचित जांच और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा, जहां उनका उपचार कराया गया। उनका कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में आवश्यक उपकरण और व्यवस्था उपलब्ध होती तो उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।
यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक जांच सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए। यदि अस्पताल में बुनियादी उपकरण तक कार्यशील स्थिति में नहीं हैं, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है।
हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
