रायपुर/सीजी एनएन 24 न्यूज: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वालीं प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित All India Institute of Medical Sciences Raipur में सुबह 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे 70 वर्ष की थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है।
तीजन बाई ने अपनी बुलंद आवाज, प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति और अद्भुत अभिनय शैली के माध्यम से पंडवानी कला को गांव की चौपालों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्हें भारतीय लोक कला की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों में गिना जाता था।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ का नाम देश-दुनिया में रोशन किया। उनका निधन न केवल राज्य बल्कि पूरे भारतीय लोक कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
बचपन से महाभारत की कथाओं से जुड़ाव
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले में जन्मी तीजन बाई बचपन से ही महाभारत की कथाओं से प्रभावित थीं। उनके नाना बृजलाल पारधी उन्हें महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। यही प्रेरणा आगे चलकर उनके जीवन का आधार बनी। उन्होंने गुरु उमेद सिंह देशमुख से पंडवानी गायन की विधिवत शिक्षा प्राप्त की और मात्र 13 वर्ष की उम्र में पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी।
पंडवानी को दिलाई विश्वस्तरीय पहचान
पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक गायन शैली है, जिसमें महाभारत के प्रसंगों को गायन, अभिनय और संगीत के माध्यम से जीवंत किया जाता है। तीजन बाई इस कला की ‘कापालिक शैली’ की सबसे प्रमुख कलाकार मानी जाती थीं। तंबूरा हाथ में लेकर उनकी प्रस्तुति दर्शकों को सीधे महाभारत के पात्रों और घटनाओं से जोड़ देती थी।
अपनी अनूठी शैली और प्रभावशाली अभिव्यक्ति के दम पर उन्होंने भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में प्रस्तुतियां दीं और पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके योगदान ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
पद्म पुरस्कारों से हुईं सम्मानित
लोक कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री और वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से पंडवानी को विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीजन बाई का जाना भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है, लेकिन उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
