मतदाता सूची की गड़बड़ी पर ECI का कड़ा एक्शन, BLO होंगे निलंबित, FIR भी होगी

By Atul Yadav - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली:   मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता करने वाले बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के खिलाफ भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि BLO द्वारा जानबूझकर की गई लापरवाही, निर्देशों की अवहेलना या ऐसी कोई कार्रवाई सामने आती है जिससे मतदाता सूची की सटीकता प्रभावित होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा तक दर्ज किया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिनमें ड्यूटी में लापरवाही, कर्तव्य निर्वहन में विफलता, दुर्व्यवहार, चुनाव आयोग के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना, चुनाव कानूनों या नियमों का उल्लंघन या किसी कार्य अथवा अकर्म से मतदाता सूची की विश्वसनीयता और सटीकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो। आयोग ने साफ किया है कि बूथ लेवल ऑफिसर चुनाव व्यवस्था की जमीनी कड़ी होते हैं और प्रत्येक बूथ पर औसतन लगभग 970 मतदाता या करीब 300 घरों की जिम्मेदारी BLO के पास होती है।

निर्देशों के मुताबिक, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) दोषी पाए जाने पर संबंधित BLO को तत्काल निलंबित करेंगे और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए संबंधित प्राधिकारी को सिफारिश भेजेंगे। इस कार्रवाई को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और छह महीने के भीतर इसकी स्थिति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दी जाएगी। यदि किसी मामले में BLO द्वारा आपराधिक कृत्य किया गया पाया जाता है, तो DEO मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अनुमति से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के CEO को यह अधिकार होगा कि वे स्वयं या DEO से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर BLO के खिलाफ कार्रवाई करें। CEO द्वारा लिया गया निर्णय संबंधित DEO के माध्यम से लागू किया जाएगा और बिना CEO की पूर्व सहमति के अनुशासनात्मक कार्रवाई का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकेगा। साथ ही, की गई प्रत्येक कार्रवाई की सूचना भारत निर्वाचन आयोग को भेजना अनिवार्य होगा।

इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर भी आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह निर्देश भारत निर्वाचन आयोग के नोटिस और सर्वोच्च न्यायालय के 19 जनवरी 2026 को WP(C) संख्या 1089/2025 में दिए गए आदेश के अनुपालन में जारी किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। याचिकाओं में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने प्रक्रिया में अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं को होने वाली परेशानी का आरोप लगाया था। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई थी कि SIR के दौरान लगभग 1.36 करोड़ मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस जारी किए गए, जिससे व्यापक असुविधा पैदा हुई। अदालत ने निर्देश दिए थे कि फ्लैग किए गए नामों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाए, दस्तावेज जमा करने की समुचित सुविधा दी जाए और सुनवाई के दौरान प्रतिनिधि रखने की अनुमति सुनिश्चित की जाए।

Share This Article