कोरबा में खाद्य सुरक्षा की पोल खुली, 120 सैंपलों में 20 फेल; पतंजलि और हल्दीराम के उत्पाद भी अमानक

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है, लेकिन इसी बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। कोरबा जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की पिछले 10 महीनों की जांच में करीब 17 फीसदी खाद्य नमूने अमानक पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जांच के दायरे में स्थानीय दुकानों के साथ देश के जाने-माने ब्रांडों के उत्पाद भी शामिल हैं।

विभाग द्वारा इस अवधि में कुल 120 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से करीब 20 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में पतंजलि के शुद्ध देसी घी और हल्दीराम के रसगुल्ला-चना के नमूने भी फेल पाए गए। इस खुलासे ने बाजार में बिक रहे पैकेटबंद और खुले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रही लापरवाही

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलने पर प्रशासन ने कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की है। स्पेशल रेस्टोरेंट पर एक लाख रुपए, कुरुदभुरी और चेक पोस्ट स्थित होटल पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं नेचुरल स्वीट्स और सरौन डेयरी पर 20-20 हजार रुपए तथा मानिकपुर निर्मल डेयरी पर 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी विजय भारत के मुताबिक, अमानक और मिसब्रांडेड खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मिलावटी दूध, खोवा और मिठाइयों से पेट संबंधी बीमारियों, फूड पॉइजनिंग, दस्त और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

कानून में सख्त सजा का प्रावधान

अभिहित अधिकारी अर्जित कुमार ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के मामलों में कार्रवाई की जाती है। असुरक्षित खाद्य सामग्री मिलने पर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है। मामले की प्रकृति और स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव के आधार पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है।

देर शाम चार प्रतिष्ठानों पर संयुक्त टीम की दबिश

इधर, कलेक्टर कुणाल दुदावत और आयुक्त दीपक अग्रवाल के निर्देश पर तहसीलदार अतुल वैष्णव के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने सोमवार देर शाम चार प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान 13 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। टीम ने काजू कतली सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानी

त्योहारों के दौरान मिठाइयां खरीदते समय केवल दुकान की लोकप्रियता या ब्रांड के नाम पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को पैकिंग, निर्माण और एक्सपायरी तिथि, खाद्य लाइसेंस तथा बिल पर भी ध्यान देना चाहिए। कोरबा में सामने आए जांच के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य सुरक्षा को लेकर निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता दोनों की जरूरत है।

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