बिलासपुर/सीजी एनएन 24 न्यूज: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों से होने वाले हादसों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने और उसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र का अवलोकन किया। शपथपत्र में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप राज्य सरकार आवारा पशुओं और कुत्तों के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई कर रही है।
कोर्ट ने सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर संतोष जताया, लेकिन स्पष्ट किया कि यह मुद्दा सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
डिवीजन बेंच ने कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाएं, रेबीज का खतरा और सड़कों पर घूम रहे मवेशियों के कारण होने वाले सड़क हादसे गंभीर चिंता का विषय हैं। इन समस्याओं पर लगातार और ठोस कार्रवाई आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राज्यभर में किए गए कार्यों, उनकी प्रगति और प्रभावी क्रियान्वयन का अद्यतन विवरण नए शपथपत्र के माध्यम से 22 सितंबर 2026 तक कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए। अगली सुनवाई में अदालत राज्य सरकार की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।
