खनिज विभाग में रॉयल्टी बुक वसूली को लेकर गहराता भ्रष्टाचार, निर्माण कार्य बाधित मनमोहन राठौर

RAVI RATHORE
3 Min Read



छत्तीसगढ़ में खनिज विभाग में बीते एक वर्ष से जारी अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की परतें अब धीरे-धीरे उजागर हो रही हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में माइनिंग विभाग द्वारा रॉयल्टी बुक जारी करने और रॉयल्टी चुकता प्रमाण पत्र देने के नाम पर ठेकेदारों व निर्माण एजेंसियों से प्रति घन मीटर ₹15 तक की अवैध वसूली की जा रही है। जो भुगतान नहीं करते, उनकी फाइलें माइनिंग और कलेक्टर कार्यालयों में महीनों लंबित पड़ी रहती हैं।

इस प्रक्रिया से न सिर्फ राज्य शासन और भारत सरकार की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि आम नागरिकों के घर निर्माण व अन्य विकास कार्य भी ठप पड़ते जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति कोरबा जिले की है, जो कि डीएमएफ (DMF) में सबसे अधिक योगदान देता है, परंतु यहीं भ्रष्टाचार की जड़ें सबसे गहरी हो गई हैं।

पूरे जिले में कुल 18 खनन क्षेत्र (खदानें) हैं, जिनमें से मात्र 2 का ही सीमांकन हुआ है — यह अपने आप में विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा रेत जैसी आवश्यक खनिज सामग्री के लिए भी रॉयल्टी बुक जारी नहीं की जा रही है, जिसके कारण निर्माण कार्यों में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि विभाग खुद छापेमारी कर “अवैध वसूली” में लिप्त दिखाई दे रहा है, जबकि उसकी मूल जिम्मेदारी रॉयल्टी बुक समय पर उपलब्ध कराना है।

वहीं मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में ऑनलाइन रॉयल्टी बुक की व्यवस्था लागू कर पारदर्शिता और सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे वहां के निर्माण कार्य समय पर और नियमपूर्वक संपन्न हो रहे हैं।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छत्तीसगढ़ में खनिज मंत्रालय सीधे आपके के पास होने के बावजूद ऐसी अव्यवस्थाएं जारी हैं। इस परिस्थिति को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मुख्यमंत्री सचिवालय स्वयं इस भ्रष्टाचार की जड़ बनता जा रहा है?

हम आपसे से मांग करते हैं कि:

रॉयल्टी बुक और रॉयल्टी चुकता पत्र जारी करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन पारदर्शी प्रणाली में लाया जाए।

अवैध वसूली में लिप्त अधिकारियों/कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

सीमांकन रहित खदानों का शीघ्र सीमांकन कर उन्हें वैधानिक रूप से संचालन हेतु उपयुक्त बनाया जाए।

आम नागरिकों और निर्माण एजेंसियों को समय पर रॉयल्टी बुक मिलना सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास कार्य अवरोधित न हो।

यदि शीघ्र उचित कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की विकास गति रुक सकती है और जन असंतोष बढ़ सकता है।

Share This Article