कुलगाम/रायपुर: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के उनके पैतृक गांवों में शोक का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है।
जानकारी के अनुसार यह हमला कुलगाम से लगभग 20 किलोमीटर दूर केलाम क्षेत्र में हुआ। मृतकों की पहचान सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है। घटना के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
परिवार का सहारा छिन गया
दीपक रात्रे करीब एक वर्ष पहले अपनी पत्नी और दिव्यांग भाई के साथ रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर गए थे। वे एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में वृद्ध मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और दो वर्षीय बेटा है। ग्रामीणों के अनुसार, पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी दीपक के कंधों पर थी। उनकी मौत की खबर मिलते ही बुंदेली गांव में मातम छा गया।
दीपक के नाना दिलहरण सांडे और मामा शंकरलाल सांडे ने राज्य और केंद्र सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
तीन महीने पहले काम की तलाश में पहुंचे थे भूपेंद्र
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी भूपेंद्र भैना अपनी पत्नी के साथ करीब तीन महीने पहले रोजगार की तलाश में कश्मीर गए थे। गांव के सरपंच धनीराम बंजारे के मुताबिक, घर पर उनका दो वर्षीय बेटा, बहन और दादी रहते हैं। उनकी मौत की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पार्थिव शरीर लाने की तैयारी
प्रशासन दोनों मजदूरों के पार्थिव शरीर को जम्मू-कश्मीर से छत्तीसगढ़ लाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है और स्थानीय प्रशासन लगातार उनके संपर्क में है।
इस आतंकी हमले ने एक बार फिर रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक और सामाजिक संकट भी गहरा गया है।
