कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: गेवरा-पेंड्रा रेल कॉरिडोर निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। निर्माण कार्य के दौरान समतलीकरण में मिट्टी की जगह बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राखड़ (फ्लाई ऐश) का उपयोग किया जा रहा है। यह राखड़ अब किसानों की फसलों के लिए मुसीबत बन गई है।
बारिश में खेतों तक पहुंची राखड़
हाल ही में हुई बारिश के चलते बेतरतीब तरीके से डाली गई राखड़ बहकर भैरोताल और कुचेना क्षेत्र के धान के खेतों तक जा पहुंची। किसानों का कहना है कि पिछले एक साल से लगातार बड़ी मात्रा में राखड़ को खेतों और खाली जमीनों में फेंका जा रहा है। गर्मियों में यही राखड़ उड़कर आसपास के रिहायशी इलाकों में गंभीर वायु प्रदूषण फैला रही थी।
किसानों की मेहनत पर पानी फिरा
एनटीपीसी दीपका रेल लाइन और बांकी-कुसमुंडा सड़क मार्ग के बीच बसे कई गांवों के खेत भी राखड़ की चपेट में आ गए हैं। किसानों ने अपनी फसलों और मवेशियों को बचाने के लिए हजारों रुपए खर्च कर फेंसिंग करवाई थी, लेकिन राखड़ के कारण उनकी मेहनत बेकार हो गई। प्रभावित किसानों का कहना है कि धान की पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे और बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे।

राखड़ से धुंध का माहौल
धनरास से कटघोरा रोड तक सड़कों पर राखड़ बिखरी हुई है। ट्रकों की ओवरलोडिंग और लापरवाह परिवहन व्यवस्था से यह राखड़ लगातार सड़कों पर गिर रही है। तेज हवाओं के दौरान राखड़ उड़कर पूरे क्षेत्र में धुंध जैसा वातावरण बना देती है, जिससे ग्रामीणों को सांस लेने में तकलीफ होती है।
किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि-
– रेल कॉरिडोर के समतलीकरण में मिट्टी का ही उपयोग हो,
– प्रभावित खेतों से राखड़ हटाई जाए,
– प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाए,
और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
