कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज: नागपंचमी भारतीय संस्कृति में नागों के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का पर्व है। इस अवसर पर RCRS – Reptile Care and Rescuer Society, Korba के अध्यक्ष अविनाश यादव ने लोगों से नागों की पूजा के साथ-साथ वास्तविक साँपों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की है।
अविनाश यादव ने कहा कि हिंदू धार्मिक परंपरा में नागों का विशेष महत्व रहा है। भगवान शिव के गले में नाग, भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन और समुद्र मंथन में वासुकि नाग की कथा नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाती है। महाभारत की परंपरा में तक्षक नाग तथा भगवान कृष्ण और कालिया नाग की कथा भी नागों से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं में शामिल हैं।
कृषि और पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका
नागपंचमी का संबंध वर्षा ऋतु और कृषि जीवन से भी जोड़ा जाता है। बरसात के दौरान पानी भरने के कारण साँप अपने बिलों से बाहर निकल सकते हैं। खेतों में साँप चूहों जैसे कृंतकों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे वे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा बनते हैं।
अविनाश यादव ने कहा कि साँप आमतौर पर इंसानों का पीछा करने या बदला लेने के लिए नहीं आते। किसी व्यक्ति से सामना होने पर वे अक्सर बचने या अपनी रक्षा करने की कोशिश करते हैं। इसलिए साँप दिखाई देने पर घबराने या उसे मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए।
साँप दिखे तो क्या करें?
उन्होंने लोगों से अपील की कि घर, खेत या आसपास साँप दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित विकल्प है।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाना जरूरी है। पूजा या धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुँचाया जाना चाहिए।
साँपों से जुड़े मिथकों से बचने की जरूरत
नागपंचमी के अवसर पर साँपों से जुड़े कई प्रचलित भ्रमों को दूर करना भी जरूरी है। साँप दूध पीने वाले जीव नहीं हैं और दूध उनका प्राकृतिक आहार नहीं है। इसी तरह नागमणि जैसी मान्यताएँ लोककथाओं और पौराणिक परंपराओं का हिस्सा हैं, वैज्ञानिक रूप से साँप के शरीर में ऐसी कोई कीमती या चमकने वाली मणि पाए जाने का प्रमाण नहीं है।
हर साँप विषैला भी नहीं होता, लेकिन किसी अनजान साँप को छूना या पकड़ना उचित नहीं है। साँप की पहचान और व्यवहार के बारे में जानकारी न होने पर दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित है।
नागपंचमी पर यह संकल्प लें
RCRS अध्यक्ष ने लोगों से अपील की कि नागपंचमी पर साँपों को पकड़कर प्रदर्शन न करें, उनके साथ फोटो या वीडियो बनाने के लिए उनके करीब न जाएँ और उन्हें दूध न पिलाएँ। वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित और स्वतंत्र रहने देना ही उनके प्रति सच्चे सम्मान का बेहतर तरीका है।
उन्होंने कहा, “नागपंचमी पर नाग की पूजा करें, लेकिन नाग को परेशान न करें। प्रकृति को पूजने का सबसे अच्छा तरीका है—प्रकृति के जीवों की रक्षा करना।”
नागपंचमी के इस अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से वन्यजीवों के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना अपनाने की अपील की।
