कुसमुंडा में भू-विस्थापितों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, एसईसीएल मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के सामने तालाबंदी, हड़िया-बर्तन रखकर रोजगार की मांग लेकर किया बड़ा आंदोलन

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:  कुसमुण्डा क्षेत्र में भूमि विस्थापित महिलाओं ने एक बार फिर रोजगार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 8 सितम्बर सोमवार सुबह से ही महिलाओं ने एसईसीएल कुसमुण्डा मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी और गेट के सामने खट लगाकर हड़िया-बर्तन रख दिए। इस अनोखे अंदाज़ में आंदोलन करते हुए उन्होंने अपनी मांगों को बुलंद किया। 

22 वर्षों से रोजगार की मांग अधूरी

आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी ज़मीन एसईसीएल (SECL) को खदान विस्तार के लिए दी थी। बदले में रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन पिछले 22 वर्षों से उन्हें न तो नौकरी दी गई और न ही कोई ठोस आश्वासन पूरा किया गया।

किसानों का आरोप है कि एसईसीएल कुसमुण्डा क्षेत्र के अधिकारी बार-बार झूठा आश्वासन देकर उन्हें गुमराह करते रहे। रोजगार की जानकारी लेने जब वे कार्यालय जाते हैं, तो न तो कोई सूचना दी जाती है और न ही आरटीआई (RTI) के तहत जवाब मिलता है। उल्टा उन्हें डांट-फटकार कर बाहर निकाल दिया जाता है।

विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और स्थानीय थाना आपसी मिलीभगत से उनकी आवाज दबाने का काम करते हैं। किसानों को जब भी अपनी बात रखने का मौका मिलता है, पुलिस दबाव बनाकर आंदोलन रोकने का प्रयास करती है। कई बार आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिक्योरिटी गार्ड संजय दुबे के जरिए झूठी एफआईआर दर्ज कराई जाती है।

विस्थापित किसानों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन जब तक रोजगार की गारंटी नहीं मिलती, वे पीछे नहीं हटेंगे। 08.09.2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल, कोयला उत्पादन पूरी तरह बंद। जीएम ऑफिस के मेन गेट और छोटे गेट पर तालाबंदी व धरना। आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी कुसमुण्डा क्षेत्र के अधिकारी और प्रबंधन की होगी।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि हड़ताल के दौरान कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी निम्न अधिकारियों की होगी- बिरेन्द्र कुमार (स्टाफ अधिकारी), प्रमोद कुमार सिंह (प्रबंधक, एचआर), भूपेन्द्र कौशिक (प्रबंधक, खनन), कपिल चौहान (अधिकारी, कुसमुण्डा क्षेत्र) साथ ही, मुख्य महाप्रबंधक सचिन ताना जी पाटिल को भी आंदोलन के दौरान की सम स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

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