नेपाल की अस्थिरता पर BJP प्रवक्ता संतोष पांडे का बड़ा बयान, बोले- “सिर्फ आंतरिक मामला नहीं, अंतरराष्ट्रीय साजिश”, वीडियो में देखिए उन्होंने आगे और क्या कुछ कहा….

By Atul Yadav - Editor
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कोरबा/सीजी एनएन 24 न्यूज:   भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राजनांदगांव से सांसद संतोष पांडे ने पड़ोसी देश नेपाल की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह केवल नेपाल का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रची गई साजिश के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

पांडे ने कहा कि दुनिया की कुछ शक्तियां छोटे देशों को स्थिर नहीं होने देना चाहतीं, ताकि वे अपने स्वार्थ साध सकें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया, श्रीलंका में भी राजनीतिक अस्थिरता पैदा की गई और अब वही स्थिति नेपाल में देखने को मिल रही है। उनके अनुसार, यह मामला केवल टिक-टॉक या सोशल मीडिया की लहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीति और षड्यंत्र छुपा हुआ है।

कांग्रेस पर सीधा हमला

चर्चा के दौरान पांडे ने कांग्रेस पर भी तीखा पलटवार किया। कांग्रेस नेताओं द्वारा भाजपा पर ‘चमचा संस्कृति’ का आरोप लगाए जाने पर उन्होंने पूछा-“दीपक बैज किसके चमचे हैं? महंत जी किसके हैं? चौबे जी किसके हैं? कांग्रेस में तो पूरी संस्कृति ही चमचागिरी की है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ता ‘सेवक भाव’ से काम करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को ‘चौकीदार’ और ‘सेवक’ कहते हैं और कई मौकों पर उन्होंने सामान्य कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर इस भाव को साबित किया है। पांडे ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसमें इस तरह का सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी व्यवहार कभी देखने को नहीं मिलता।

आदिवासी अपमान का मुद्दा
बिलासपुर में ‘वोट छोड़ो, गद्दी छोड़ो’ अभियान के दौरान एक आदिवासी नेता से माइक छीने जाने की घटना पर पांडे ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और आदिवासी समाज का अपमान है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा आदिवासियों को सम्मान दिया है। उदाहरण स्वरूप उन्होंने बताया कि भाजपा ने देश को पहली बार एक आदिवासी राष्ट्रपति और प्रदेश को आदिवासी मुख्यमंत्री दिया है। इसके अलावा पार्टी ने बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह, गुंडा धुर और सुरेंद्र साय जैसे आदिवासी नायकों के नाम पर पुरस्कार और सम्मान कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि समाज में उनके योगदान को याद रखा जा सके।

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