आज मां कालरात्रि की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, भोग, कथा और मंत्र

By Atul Yadav - Editor
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Shardiya Navratri 2026 Day 7 Puja Vidhi: शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करने से भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। देवी को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, प्रिय भोग, पौराणिक कथा और आरती।

Shardiya Navratri 2026 Day 7: मां कालरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा से पहले पंचांग के अनुसार अपने क्षेत्र के समय की पुष्टि जरूर कर लें।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 बजे से 5:47 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
  • अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक

नोट: दिए गए मुहूर्तों का स्थानीय पंचांग से सत्यापन आवश्यक है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि (Maa Kalaratri Puja Vidhi)

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।
  2. मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके देवी का ध्यान करें।
  3. परंपरा के अनुसार, देवी को स्नान या प्रतीकात्मक अभिषेक कराएं और वस्त्र अर्पित करें।
  4. मां को कुमकुम, लाल चंदन और फूल चढ़ाएं।
  5. घी का दीपक जलाकर धूप-दीप अर्पित करें।
  6. मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा सप्तशती या व्रत कथा का पाठ करें।
  7. देवी को गुड़, गुड़ से बनी मिठाई और फल का भोग लगाएं।
  8. मां कालरात्रि की आरती करें और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करें।
  9. पूजा के अंत में प्रसाद वितरित करें।

मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?

मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। नवरात्र के सातवें दिन भक्त देवी को गुड़, गुड़ से बनी मिठाइयां, खीर और फल अर्पित कर सकते हैं। भोग लगाने के बाद श्रद्धापूर्वक मां की आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से मां कालरात्रि की आराधना करने से भक्तों को साहस, आत्मबल और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रेरणा मिलती है।

मां कालरात्रि की पौराणिक कथा (Maa Kalaratri Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों के अत्याचार से तीनों लोकों में भय का वातावरण बन गया था। परेशान होकर देवताओं ने देवी दुर्गा की आराधना की और असुरों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की।

कथा के अनुसार, रक्तबीज को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरते ही उसके समान एक अन्य असुर उत्पन्न हो जाता था। इसी कारण उसका वध करना कठिन हो गया था।

तब देवी दुर्गा ने अपने उग्र स्वरूप मां कालरात्रि के रूप में प्रकट होकर रक्तबीज का सामना किया। मां कालरात्रि ने उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोककर उसका संहार किया। इस प्रकार देवी ने देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।

धार्मिक मान्यता में मां कालरात्रि को दुष्टों का विनाश करने वाली और अपने भक्तों के भय दूर करने वाली देवी माना जाता है।

मां कालरात्रि का बीज मंत्र (Maa Kalaratri Beej Mantra)

मां कालरात्रि की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:

क्लीं ऐं श्री कालिकायै नमः।

मां कालरात्रि के अन्य मंत्र

मां कालरात्रि की पूजा में इन मंत्रों का भी जाप किया जाता है:

मंत्र 1:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।

मंत्र 2:

ज्वाला कराल अति उग्रम शेषासुर सूदनम्।

त्रिशूलं पातु नो भीते भद्रकाली नमोऽस्तुते॥

मंत्रों का जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करें।

मां कालरात्रि की आरती (Maa Kalaratri Ki Aarti)

मां कालरात्रि की पूजा के बाद भक्त देवी की आरती करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। आरती के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।

काल के मुख से बचाने वाली॥

दुष्ट संहारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खड्ग-खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गाएं स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम, ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट न आवे।

महाकाली मां जिसे बचावे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥

मां कालरात्रि की पूजा का धार्मिक महत्व

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा शक्ति, साहस और निर्भयता के प्रतीक के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी अपने भक्तों को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं। इस दिन व्रत रखने, मंत्र जाप करने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।

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